मां वाराही धाम में आस्था का महासंगम: देवीधुरा में फल-फूलों से खेली गई ऐतिहासिक बग्वाल,सीएम धामी ने दिए ₹10 करोड़ के विकास कार्य

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चम्पावत। विश्व प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां वाराही धाम देवीधुरा में रक्षाबंधन के पावन पर्व पर ऐतिहासिक और सांस्कृतिक 'बग्वाल मेले' का भव्य आयोजन हुआ। आस्था, परंपरा और उत्साह के इस अनूठे संगम का साक्षी बनने के लिए देश-विदेश से हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। सदियों पुरानी इस परंपरा में चार खामों और सात थोक के योद्धाओं (बग्वालियों) ने हिस्सा लिया। इस वर्ष पाषाण युद्ध (पत्थर मारने की प्रथा) की जगह फल और फूलों से बग्वाल खेली गई, जो 1 बजकर 48 मिनट से शुरू होकर 1 बजकर 55 मिनट तक चली।

बग्वाल मेले में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी शामिल हुए। वह हेलीकॉप्टर से देवीधुरा हेलीपैड पहुंचे, जहां कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा, जिलाधिकारी मनीष कुमार, पुलिस अधीक्षक रेखा यादव समेत जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। पारंपरिक छोलिया नृत्य की प्रस्तुति के बीच मुख्यमंत्री का स्वागत किया गया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने शक्तिपीठ मां वाराही देवी की विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। मुख्यमंत्री ने देवीधुरा की पावन भूमि और बग्वाल मेले को उत्तराखंड की गहरी आस्था, समृद्ध लोक संस्कृति और सामुदायिक सहभागिता का जीवंत प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि आधुनिक विकास के साथ प्रदेश की सांस्कृतिक जड़ों, लोक परंपराओं और ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण भी सरकार की प्राथमिकता है। विकास को केवल सड़क, भवन और अन्य बुनियादी ढांचे तक सीमित न रखते हुए धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों को भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने देवीधुरा को नगर पंचायत क्षेत्र बनाने की बात कही। साथ ही यहां 9 करोड़ 80 लाख रुपये की लागत से बहुमंजिला पार्किंग का निर्माण जल्द कराने की घोषणा की। उन्होंने बताया कि बग्वाल मेले को राजकीय मेला घोषित किया जा चुका है, जिससे इसकी व्यवस्थाओं और आयोजन की गरिमा को और मजबूत किया जा सके। मंदिर क्षेत्र में भी कई विकास कार्य जारी हैं। देवीधुरा मंदिर परिसर में 4.27 करोड़ रुपये की लागत से गढ़वाल खाम भवन और 4.57 करोड़ रुपये से रणकोची मंदिर के पुनर्निर्माण का कार्य प्रगति पर है। इसके अलावा घटोत्कच मंदिर का सौंदर्यीकरण, घटकु हिडिंबा मंदिर का निर्माण, सप्तेश्वर महादेव मंदिर में स्नानघाट और लधौनधुरा मेला स्थल का सौंदर्यीकरण पूरा हो चुका है। मुख्यमंत्री ने बताया कि घटोत्कच से झालिमाली मंदिर मार्ग के डामरीकरण पर 1.95 करोड़ रुपये, विभिन्न मंदिरों के सौंदर्यीकरण पर 4.70 करोड़ रुपये और पूर्णागिरि मार्ग पर पांच करोड़ रुपये की लागत से पथ प्रकाश व्यवस्था के कार्य किए जा रहे हैं। पाताल रुद्रेश्वर, खेतीखान सूर्य मंदिर, भूमिया देव मंदिर, भिगराड़ा मंदिर और डुंगरी फत्याल शिव मंदिर से जुड़े विकास कार्य भी जारी हैं। सीएम ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में धार्मिक अवस्थापना और सौंदर्यीकरण के तहत 68 करोड़ 58 लाख रुपये की लागत से 397 कार्य किए गए हैं। उन्होंने कहा कि धार्मिक पर्यटन का उद्देश्य केवल मंदिरों और धार्मिक स्थलों का विकास करना नहीं है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देना और युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर पैदा करना भी है। प्रधान पुजारी की विधिवत पूजा-अर्चना के बाद बग्वाल का शुभारंभ हुआ। इसके बाद वालिक, चम्याल, गहड़वाल और लमगड़िया खाम के बग्वाली मैदान में पहुंचे। पारंपरिक रंग-बिरंगे वस्त्रों और पगड़ियों में सजे बग्वालियों के हाथों में बांस और रिंगाल से बनी ढालें थीं। शंखनाद और मां वाराही के जयकारों के बीच बग्वाल शुरू हुई। फलों और फूलों की बरसात के बीच बग्वाल मैदान में उत्साह चरम पर पहुंच गया। पीठाचार्य पंडित कीर्तिबल्लभ जोशी के अनुसार फल-फूल से खेली जाने वाली बग्वाल को अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। बग्वाल के बाद परंपरा के अनुसार योद्धाओं ने एक-दूसरे से गले मिलकर भाईचारे का संदेश भी दिया। रक्षाबंधन के अवसर पर बच्चियों और महिलाओं ने मुख्यमंत्री धामी को राखी बांधी। मुख्यमंत्री ने इसे अपने लिए भावनात्मक क्षण बताते हुए सभी को पर्व की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने युवा पीढ़ी से उत्तराखंड की समृद्ध लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया।