एसआईआर नोटिस से घबराने की जरूरत नहीं! आपदा में दस्तावेज खो गए तो भी सुरक्षित रहेगा वोट! चुनाव आयोग ने दी बड़ी राहत

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देहरादून। उत्तराखंड में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के बीच उन हजारों मतदाताओं के लिए राहत भरी खबर आई है, जिनके घर और जरूरी दस्तावेज प्राकृतिक आपदा में नष्ट हो गए हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) डॉ. बीवीआरसी. पुरुषोत्तम ने स्पष्ट किया है कि ऐसे मतदाताओं को घबराने की आवश्यकता नहीं है। यदि किसी व्यक्ति के दस्तावेज बाढ़, भूस्खलन या अन्य आपदा में क्षतिग्रस्त हो गए हैं, तो निर्वाचन विभाग स्थानीय बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) की रिपोर्ट के आधार पर नोटिस का निपटारा करेगा, ताकि पात्र मतदाताओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में आयोजित प्रेस वार्ता में मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि राज्य में मतदाता सूची को त्रुटिरहित और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान तेजी से चल रहा है। एसआईआर के तहत जारी नोटिसों का वितरण भी अंतिम चरण में पहुंच चुका है। उन्होंने बताया कि 24.30 लाख नोटिसों के लक्ष्य के मुकाबले 20.27 लाख नोटिस अब तक मतदाताओं तक पहुंचाए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि नोटिस मिलने का मतलब यह नहीं है कि मतदाता का नाम मतदाता सूची से हटाया जा रहा है। कई मामलों में केवल नाम, पता, आयु या अन्य सामान्य विसंगतियों को ठीक करने के लिए नोटिस जारी किए गए हैं। इसलिए मतदाता किसी भी प्रकार के भ्रम में न आएं और निर्धारित समय के भीतर अपना जवाब अवश्य दें, ताकि मतदाता सूची का शुद्धिकरण समय पर पूरा किया जा सके। डॉ. पुरुषोत्तम ने बताया कि यदि किसी मतदाता का घर आपदा में बह गया हो और उसके साथ सभी जरूरी दस्तावेज भी नष्ट हो गए हों, तो संबंधित निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईआरओ) स्थानीय बीएलओ की रिपोर्ट और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर मामले का निस्तारण करेंगे। इस प्रक्रिया में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि वास्तविक और पात्र मतदाताओं के अधिकार सुरक्षित रहें तथा उन्हें अनावश्यक रूप से परेशान न होना पड़े। एसआईआर अभियान की प्रगति पर जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि 14 जुलाई से 5 अगस्त के बीच दावा और आपत्ति चरण में फॉर्म-6 के 57 हजार, फॉर्म-7 के 22,668 तथा फॉर्म-8 के 26,145 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इन सभी आवेदनों का नियमानुसार परीक्षण और निस्तारण किया जा रहा है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने यह भी बताया कि नियमों के अनुसार एक सामान्य नागरिक अधिकतम पांच मतदाताओं के संबंध में आपत्ति दर्ज करा सकता है, जबकि मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बीएलए-2 प्रतिदिन अधिकतम 10 मतदाताओं के नाम पर आपत्ति दर्ज कर सकते हैं। पूरे अभियान के दौरान राजनीतिक दलों से लगातार सुझाव और फीडबैक भी लिया जा रहा है। विधानसभा स्तर पर ईआरओ, जिला स्तर पर डीईओ और राज्य स्तर पर सीईओ नियमित समीक्षा बैठकें कर अभियान की निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सामान्य विसंगतियों वाले मतदाताओं के मताधिकार पूरी तरह सुरक्षित हैं और उनके मामलों का सरल एवं पारदर्शी प्रक्रिया के तहत समाधान किया जाएगा। उन्होंने सभी मतदाताओं से अपील की कि नोटिस मिलने पर घबराने के बजाय समय पर आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराएं, ताकि मतदाता सूची अधिक सटीक, त्रुटिरहित और विश्वसनीय बनाई जा सके।