झारखंड के आम व्यवसाय में ₹60.51 लाख का बंपर कारोबार: 115 एफपीओ को मिला सीधा लाभ

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रांची। कभी स्थानीय हाट-बाजारों तक सीमित रहने वाला झारखंड का आम अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी पहचान बना रहा है। राज्य सरकार और झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (जेएसएलपीएस) की पहल ‘पलाश ब्रांड’ के तहत चल रही झारखंड मैंगो मार्केटिंग इनिशिएटिव ने किसानों और ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति बदलने का काम किया है। आज झारखंड का आम न केवल देश के बड़े रिटेल नेटवर्क तक पहुंच रहा है, बल्कि दुबई और लंदन जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपनी मिठास बिखेर रहा है।

राज्य में लगभग 1.86 लाख एकड़ क्षेत्र में आम के बागान फैले हुए हैं, जिनसे करीब 2.15 लाख ग्रामीण परिवारों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार और आजीविका के अवसर मिल रहे हैं। इस वर्ष लगभग 52 हजार एकड़ क्षेत्र में आम की फसल पूरी तरह तैयार है और करीब 50 हजार मीट्रिक टन उत्पादन का अनुमान लगाया गया है। इससे किसानों को बेहतर आय मिलने की उम्मीद है। इस पहल की सबसे खास बात यह है कि इसमें ग्रामीण महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। “ग्रामीण महिलाओं की श्रम शक्ति का सम्मान” के उद्देश्य के साथ स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं आम के संग्रहण, ग्रेडिंग, पैकेजिंग, बिक्री और मार्केटिंग तक की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। इससे महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और आत्मनिर्भरता को भी मजबूती मिली है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में झारखंड ने आम निर्यात के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। सिमडेगा जिले से जेबी एक्सपोर्टर्स के माध्यम से 1,580 किलोग्राम प्रीमियम आम सीधे लंदन (यूके) भेजे गए हैं। वहीं रामगढ़ क्लस्टर से 1,500 मीट्रिक टन से अधिक आम दुबई (यूएई) निर्यात किए गए हैं। सिमडेगा, रामगढ़ और पूर्वी सिंहभूम जिले इस वैश्विक पहल में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। आम की गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए बाजार को तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है। ग्रेड-ए के उच्च गुणवत्ता वाले आमों को एपीडा प्रमाणित निर्यातकों के माध्यम से यूएई, सऊदी अरब और यूके जैसे देशों में भेजा जा रहा है। घरेलू बाजार में इन्हें ‘पलाश मार्ट’ और ‘अपना मार्ट’ के माध्यम से 60 रुपये प्रति किलो की दर पर बेचा जा रहा है। गुमला के किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) ने अकेले 2,000 किलो आम की आपूर्ति अपना मार्ट को की है।

ग्रेड-बी आमों को संगठित खुदरा बाजारों और पलाश के रिटेल नेटवर्क में भेजा जा रहा है, जबकि ग्रेड-सी आमों की बिक्री स्थानीय बाजारों, पलाश कैनोपी कियोस्क, बस स्टैंड, जिला मुख्यालयों और साप्ताहिक हाटों के माध्यम से की जा रही है, ताकि आम जनता तक सस्ती दरों पर फल पहुंच सके। राज्य में सक्रिय करीब 115 किसान उत्पादक संगठनों को पलाश मैंगो कैनोपी काउंटर्स से जोड़ा गया है। इन काउंटर्स के जरिए अब तक लगभग 2,24,200 किलोग्राम आम की बिक्री हो चुकी है, जिससे 60.51 लाख रुपये से अधिक का कारोबार दर्ज किया गया है। यह आंकड़ा किसानों और ग्रामीण महिलाओं के लिए बड़ी आर्थिक उपलब्धि माना जा रहा है। बाजार विस्तार को और मजबूती देने के लिए राज्य सरकार ब्लॉक और जिला स्तर पर किसान मेले तथा बायर-सेलर मीट आयोजित कर रही है। साथ ही ऑनलाइन और आधुनिक रिटेल बाजारों में पहुंच बढ़ाने के लिए रिलायंस फ्रेश, ब्लिंकिट और कशिश मॉल जैसे बड़े कॉर्पोरेट समूहों के साथ बातचीत अंतिम चरण में है। ‘पलाश ब्रांड’ की यह सफलता न केवल झारखंड के आम को वैश्विक पहचान दिला रही है, बल्कि हजारों किसानों और महिलाओं के जीवन में आर्थिक समृद्धि की नई कहानी भी लिख रही है।